Tuesday, 27 March 2012

शुरुआत

गड्ढे पे गड्ढा
हर गड्ढे के बाद फिर एक गड्ढा
किसने खोदे इतने गड्ढे
किसे मेरी ज़िन्दगी में इतनी दिलचस्पी है
कहीं खुद ज़िन्दगी ने ही तो नहीं
उसे कोई रंज हो मुझसे
मुझे तो है- उससे


पर अगर ये यूँ ही चलता जाए
जो हम तालमेल न बिठा पाएं
तो कैसे जिएंगे साथ- साथ
जो कदमताल न मिला पाएं
तो कैसे कटेगी उम्र पचास

चल ज़िन्दगी, एक कोशिश करें,
साथ जीने की, साथी बनने की
शुरुआत करें
आ हम बात करें, इसी तरह शुरुआत करें


3 comments:

  1. चल ज़िन्दगी, एक कोशिश करें,
    साथ जीने की, साथी बनने की
    शुरुआत करें
    आ हम बात करें, इसी तरह शुरुआत करें

    बहुत खूब तृप्ति जी !

    सादर
    -----
    ‘जो मेरा मन कहे’ पर आपका स्वागत है

    ReplyDelete
  2. एक सुझाव है यदि पोस्ट का कोई टाइटिल भी दें तो और अच्छा लगेगा।

    सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. :) maine posts ke title de diye hain, shukriya dhyaan dilaane ke liye.

      Delete

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