Thursday, 22 March 2012

role reversal

बचपन में ऊँगली पकड़ कर
रोड क्रोस करवाती थी वो
इन दिनों अनायास ही
रोड क्रोस करते हुए
मेरा हाथ उनके हाथ
की और बढ़ जाता है

बचपन में वो गौद में लिए
अस्पतालों में ऊपर नीचे चक्कर काटती थी
इन दिनों वो हमारे फ्री होने का इंतज़ार करती हैं

बचपन में जोर ज़बरदस्ती से
हमें दूध, सब्जी खिलाई जाती थी,
आज कल ऐसा इनके साथ होता है

बचपन की बीमारी में वो दवाइयां निकाल के
पानी संग हाथ में थमाती थी
इन दिनों हम ऐसा करते हैं

जिसने हमें दुनिया दिखाई, सिखाई
आज उसी का हम दुनियादारी का पाठ पढ़ा देते हैं

जिसने बोलना, पढना सिखाया
उसे ही कितनी बातों पे टोक देते हैं

बचपन में पूरा दिन काम करती माँ के पीछे पीछे डोला करते थे
इन दिनों काम करते हुए हम आगे रहते हैं और वो ज़रा से पीछे

कैसे हमारे दौर की माएं इतनी आसानी से background  में सरक जाती हैं
हम इतने समझदार कबसे हो गए? माँ इतनी आश्रित कब से हो गयी?
ये role reversal  कब से हो गया ?

माँ अब भी माँ है
हम अब भी बच्चे हैं
caretaking mutual  हो गयी है

4 comments:

  1. अच्छा संदेश और दिल को छू जाने वाली रचना।


    सादर

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  2. aapka comment padhne ke baad maine vapas ke ise padha,,,dekh rahi thi kya un shabdon ke laayak hai jo aapne iski tareef mein bakshe hain...result nahi nikaal paayi par bahaut bahaut shukriya :)

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  3. जिसने हमें दुनिया दिखाई, सिखाई
    आज उसी का हम दुनियादारी का पाठ पढ़ा देते हैं

    इन बेहतरीन पंक्तियों को फिर से पढ़िएगा रिज़ल्ट निकालने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी :)

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  4. माँ अब भी माँ है
    हम अब भी बच्चे हैं !!

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