Monday, 5 March 2012

भगवन

भगवान् इंसान नहीं है
भगवान् भगवान् है
गर ये इंसान होता
इंसान के ही हाथों पिट पिट के मरा होता
गोली से एक झटके में मारने का क्या मज़ा है
उसे तो पिट पिट के मरना होता

पर भगवान् तो कहानी है
theory है, नाम मात्र है
झूठ है, धोखा है


भगवान् सिर्फ नाम है
इसके पीछे कोई शक्ल, कोई शक्ति नहीं
भगवान्, अल्लाह, परमात्मा
सब नाम है उसके, जो है ही नहीं


मान लो, इस पूरी theory का नाम
भगवान् नहीं, रोबेर्ट रखा गया होता
तो हम कहते, रोबेर्ट सब का रखवाला है
मेरे ज़िन्दगी में सब रोबेर्ट के लिखे अनुसार ही होता है
रोबेर्ट से डरो, वो सब देखता है,
कौन रोबेर्ट?
कौन भगवान्?

जिसका अस्तित्व है, जो विद्यमान है 
वो उसकी और आस लगाये, हाथ जोड़े खड़ा है,
जिसका कोई अस्तित्व ही नही


भगवान् का सृजन इंसान ने किया है, 
न की इसका उल्टा 


अपने-अपने मंदिरों में भगवान् की मूर्तियों की जगह 
मोबाइल, मछरदानी वगेरह रख लो
उसे विधिवत पूजो, आस लगाओ,
अर्जियां डालो महीने भर
अंत में होगा यही, की होगा कुछ नहीं, 
मूर्तियों से भी कहाँ कुछ हुआ था 
मोबाइल, मछरदानी वो काम तो करते हैं
जिसके लिए वो बने हैं







4 comments:

  1. tumhara comment padhne ke baad aur uska wahin par jawaab dene ke baad abhi tumhaari yeh kavita padhi..tum bhi kahin na kahin wahi keh rahi ho..jo kahin na kahin main bhi keh raha hoon..har kavi ka apna raasta hota hai..par kai baar unko pahuchana ek hi manzil pe hota hai..shubhkaamnaayein..

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  2. भगवान [भ=भूमि,ग =गगन ,व =वायु,। (आ की मात्रा)=अग्नि,न=नीर ]
    =इस तरह प्रकृति के पंच तत्व


    या

    GOD [G=generator,Operator,D=Destroyer]=ब्रह्मा,विष्णु,महेश

    या खुदा= जिसे किसी ने बनाया न हो अर्थात जो खुद ही बना हो


    आपने कविता अच्छी लिखी है।


    सादर

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