Sunday, 12 February 2012

दीवारें सुनती हैं सब


दीवारें सुनती हैं सब 
हमारी बातें, हमारी फुसफुसाहटें

दीवारें सुनती हैं वो सब 
जो हम बतियाते नहीं
दीवारें सुनती हैं वो भी 
जो हम छुपाते हैं
अक्सर खुद से, तो कभी दूसरों से


दीवारें सुनती हैं सब 
जो हम दिन में नहीं बोलते,
रातों को पड़े बिस्तर पर नहीं सोचते

दीवारों को याद है वो बातें 
जो मैंने उसे कहनी चाही
पर कभी दिल तो कभी मुह में दबा ली 

दीवारों को याद है कई रातें
कई रातों में कही हुई कई बातें
कभी खुद से किये हुए वादे
जो अब भूलने सी लगी हूँ मैं

दीवारें पूछती नहीं 
पर सुनती हैं सब
हम बतातें जो हैं

21 comments:

  1. दीवारों के कान होते हैं ना...
    और उनकी रेंज भी बड़ी लंबी है...
    u write very nice...

    i too write :-)
    u see, we both have same blog names...
    good to see u..
    thanks for joining my blog..
    regards.

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    1. kal hi aapki rachnayein padi thi, aap likhti to accha hain hi mazaak bhi accha karti hain, aapka likha hua undekha karne laayak nahi hai, bilkul bhi nahi. aap yun hi likhti rahein aur hum magn hoke yun hi padhte rahenge.

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  2. गलती से आ गया आपके ब्लॉग पर, जैसा की विद्या जी ने कहा उनके ब्लॉग का नाम भी यही है, उन्ही के ब्लॉग ओर जा रहा था की यहाँ पहुँच गया.

    अच्छा लगा पढ़कर आपको ...

    दीवारों को याद है कई रातें
    कई रातों में कही हुई कई बातें
    कभी खुद से किये हुए वादे
    जो अब भूलने सी लगी हूँ मैं
    Life is Just a Life
    My Clicks
    .

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    1. :)shukriya aapka neeraj ji raasta bhatakne ke liye.

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  3. deewar dheere se bollee mujhse
    koi aayaa hai nirantar ke ghar par
    kam se kam istakbaal to karlo uskaa
    thodaasaa dhanywaad dedo
    sundar kavitaa likhne ke liye
    saath mein badhaayee bhee dedo

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  4. Replies
    1. i should change me blog's name to 'i too write' as vidhya ji came here before me and she so duly deserves it :)

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  5. I remember one poem i had written
    he Silent Walls
    Walls see
    Acts of love
    Acts of hate
    Happiness
    &
    Agony
    Walls hear
    Words of love
    Words of hate
    Words of despair
    &
    Hope
    They remain
    Silent spectator
    Do not support
    Do not reject
    I wish
    God provides
    Speech to them
    To reveal the truth
    That lies hidden
    In their heart
    01-09-2011
    1429-04-09-11

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    1. mujhe aisa lag rha hai jo kuch main nhi likh paayi woh aapki is poem mein likha hua hai esp the last lines, thank u.

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    2. Thanks
      Go to http://nirantarajmer.com
      and
      http://nirantarkahraha.blogspot.com
      to read more of my thoughts

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  6. दीवारों को याद है कई रातें
    कई रातों में कही हुई कई बातें
    कभी खुद से किये हुए वादे
    जो अब भूलने सी लगी हूँ मैं
    divaron pr bahut khoob likha hai aapne
    badhai
    rachana

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  7. आपको रामनवमी और मूर्खदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    ----------------------------
    कल 02/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  8. दीवारें सब सुनती हैं ...कभी कभी दीवारों को सुनाना भी अच्छा लगता है .... अच्छी रचना

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  9. .....क्यूंकि दीवारें पहचानती हैं हर उस स्पर्श को ..जब हम मिलके रोये थे ......हर उस चीख को ....जिससे उन्होंने अपने भीतर ज़ज्ब कर लिया ....हर उस आहट को जब जब हमने कान लगाकर उन पदचापों को सुनने की कोशिश को थी
    ...दीवारें जानती हैं सब कुछ ...!!!!

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    1. :)दीवारें जानती हैं सब कुछ और आप भी,,,बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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  10. सार्थक अभिवयक्ति....

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