Wednesday, 22 February 2012

चूहा दौड़, बिल्ली आई

आज मौत पे इतना जो लिखा
तो ख़याल आया की जब मरना ही है
तो chocolates खा के ही क्यूँ न मरुँ?


क्यूँ वो इतने दिनों से घर में रखी हैं  
और मैं उन्हें खा नहीं रही

क्या होगा अगर chocolates खाऊंगी
थोड़ी मोटी हो जओंगी,
क्या होगा अगर थोड़ी मोटी हो जाऊंगी
मनपसंद dresses नहीं पहन पओंगी
कपड़ों की choices कम हो जाएँगी
पतलों की बीच में मोटी कहलाऊंगी
या असल बात अब कह ही दूँ -
मैं मोटी होकर कई लोगों को 
पहले जितनी पसंद नहीं आउंगी 


शुरू हुई guilty , शुरू हुई चूहा दौड़, बिल्ली आई की कहानी
मैं चूहा बन दौडूंगी और बिल्ली बनी सच्चाइयां मेरे पीछे भागेंगी


कभी कभी चूहे को लगेगा बिल्ली दूर है
थोडा सुस्ता लूँ, थोड़ी और chocolates खा लूँ, 
कभी होश आएगा बिल्ली फिर दौड़ पड़ी है मेरे पीछे, 


कभी रुक कर बिल्ली की और गुर्राऊं?
नही, ऐसा मैं नहीं करुँगी 
ये दौड़ तो मुझे जारी रखनी ही पड़ेगी
इस जद्दोजहद का नाम ही तो ज़िन्दगी है. 

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