Wednesday, 29 February 2012

भंवर

भंवर
ज़िन्दगी का ऐसा भंवर
की अब जी नहीं चाहता
मेरे हाथ पाक रहे
जिसने ऐसे हालात पे ला खड़ा किया है
उसका क़त्ल अब किसी रात हो ही जाए


उसको जाना तो जाना नफ़रत की हद्द क्या है
वो ख़तम हो तो जानूं
जलते दिल पे ठंडक पड़ना क्या है
रात दिन का सुकून क्या है

2 comments:

  1. इस सार्थक प्रविष्टि के लिए बधाई स्वीकारें.
    आपका मेरे ब्लॉग meri kavitayen की नवीनतम प्रविष्टि पर स्वागत है.

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  2. :) shukriya...badhaai aur invitation dono ke liye

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