Tuesday, 29 October 2013

(wrote while flying from mumbai to jpr, oct'13)

आओ किसी शाम बादलों पे जा बैठें
किसी शाम चाय यहीं पीई जाए 
क्या soulmates यहीं मिलते हैं?
क्या soulmates कहीं मिलते हैं?
काले घने बादलों की चादर और 
वो दूर जो लाल सा चमकता है 
उसे पकड़ सकती हूँ मैं?
क्या इन बादलों पे आज रात गुज़ार सकती हूँ मैं ?
क्या बादल दिल की बातें समझते हैं बिना बताए?
soulmate न मिले तो क्या बादल समझेंगे...


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