Tuesday, 12 March 2013

अटाले


क्यूँ है उसे खुद से शिकायत,
क्यूँ नहीं बहती अब उसकी बातों में नदी

क्यूँ नहीं मिलती, ढूँढने से भी
बचा के रखी थी, अटाले में उसने
जो थोड़ी सी हँसी

4 comments:

  1. कभी कभी जिन्दगी रुक सी जाती है
    सुन्दर प्रस्तुति

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  2. थोड़ी सी हँसी ...सुन्दर प्रस्तुति

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  3. थोड़ी सी हँसी ...सुन्दर प्रस्तुति

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