Sunday, 6 January 2013

तो एक बार जोर से बोल दो

दिन भी थक जाता होगा
घर जा अपने, सो जाता होगा
सुना है की बिजी-बहुत रहता है
बतियाने के लिए पास बुलाओ
तो नखरे-बहुत करता है
जितने मुंह , उतनी बात है यहाँ
कोई कहे दिन, तो कोई कहे रात है यहाँ
सौ बातों की एक बात
poem है बकवास :)
बकवास भी अपने बात में एक बात होती है
उसकी एक पहचान, एक औकात होती है
औकात पे ना जाना यहाँ
सबको प्यारी है अपनी माँ यहाँ
फिर कहती हूँ वहीँ बात
poem है बकवास :)
अब जब पढ़ की चुके हो
तो एक बार जोर से बोल दो
जय श्याम बाबा की, ज़िला-खरवास !

2 comments:

  1. पोएम बकवास तो बोलेंगे नहीं, हाँ लेकिन जय श्याम बाबा की तो बोल ही सकते हैं :)

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